अन्नप्राशन संस्कार हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है, जिसमें शिशु को पहली बार अन्न (ठोस भोजन) ग्रहण कराया जाता है। यह संस्कार सामान्यतः शिशु के छठे या आठवें माह में शुभ मुहूर्त में सम्पन्न किया जाता है। मान्यता है कि अन्नप्राशन संस्कार से शिशु के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास का शुभ आरंभ होता है।

इस संस्कार में भगवान से शिशु के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, बल, बुद्धि और समृद्ध भविष्य की कामना की जाती है। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिशु को पवित्र अन्न (अक्सर खीर या चावल) खिलाया जाता है। श्रद्धा और परंपरा से किया गया अन्नप्राशन संस्कार शिशु के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मंगलकारी प्रभाव लाता है।

🕉️ पूजा विधि

• गणेश पूजन एवं संकल्प
• कलश स्थापना
• नवग्रह एवं देवता पूजन
• वैदिक मंत्रोच्चार
• शिशु को प्रथम अन्न ग्रहण
• आरती एवं आशीर्वाद

⏰ समय

⏱️ लगभग 1 से 1.5 घंटे

🔑 अन्नप्राशन संस्कार के लाभ

  • शिशु के स्वास्थ्य एवं पोषण का शुभ आरंभ
  • शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहायता
  • नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा
  • बुद्धि, बल और दीर्घायु की प्राप्ति
  • पारिवारिक सुख-शांति एवं मंगल