वे लोग जिनके परिवार में पुत्र नहीं हैं

वे लोग जिनके परिवार में पुत्र नहीं हैं

हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि उसकी अंतिम यात्रा सम्मान और धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हो।

समाज में एक धारणा प्रचलित है कि अंतिम संस्कार की मुख्य जिम्मेदारी पुत्र द्वारा निभाई जाती है।

किन्तु वर्तमान समय में कई ऐसे परिवार हैं,
जहाँ केवल पुत्रियाँ ही हैं —
और वे भी अपने माता-पिता के प्रति समान श्रद्धा और कर्तव्य निभाना चाहती हैं।

ऐसी स्थिति में,
“ओम संकल्प” यह सुनिश्चित करता है कि
आपकी अंतिम यात्रा शास्त्रसम्मत विधि-विधान के अनुसार,
योग्य ब्राह्मणों द्वारा पूर्ण सम्मान के साथ संपन्न हो।

यह केवल एक परंपरा नहीं,
बल्कि श्रद्धा, भाव और कर्तव्य का विषय है —
जिसे हर कोई अपने तरीके से पूर्ण कर सकता है।

  • पुत्र न होने पर भी शास्त्रसम्मत अंतिम संस्कार
  • योग्य ब्राह्मणों द्वारा सभी विधियों का पालन
  • पुत्रियों के सम्मान और भावनाओं का आदर
  • हर परिस्थिति में गरिमा और श्रद्धा सुनिश्चित
  • “श्रद्धा और भाव ही सबसे बड़ा कर्तव्य है —न कि केवल परंपरा का एक रूप।”

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